Jain Tantra Shastra by राजेश दीक्षित - Rajesh Dixit

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(० ) २. श्री अजितनाथ तीर्थकर अनाहत सर्ववशीकरण मग्त्र-पन्त्र निम्नलिखित मन्त्र श्री अजिननाय तीर्थवर का अनाहत मन्त्र है। इसके प्रयोग से राजदरबार में अधिकारीगण तथा अन्य सब लोगो वा वशीकरण होता है । मस्त्र- 3 णमो भगवदों अजितस्स धम्मे भगवदों विज्साणं महाविज्ञाण । 3 णमो जिणाण, ७ णनो परमोहि जिणाणं, 3 णमों सब्योहि जिणाण भगवदों अरहतों भजितस्स सिज्सधम्मे भगवदो विज्सर महाविज्सर अजिते अपराजिते पाणिपादे महावले अनाहत विद्या स्वाहा ।” साधम-विधि--सर्वे प्रथम आगे प्रदर्शित चिन (सप्या ९) के वो फिसी स्वर्ण, चाँदी अथवा तोंवे के पत्र पर खदवाले। फिर एक हु | र्‌ हि पटरी या २2




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