रामायण उपदेश रत्नाकर | Ramayan Updesh Ratnakar

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
1.99 MB
कुल पष्ठ :
92
श्रेणी :
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लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)(११)ब्राह्मणसेवा ।बनारस हरदोहा ।
मन क्रम वचन कपट ताजे । जो कर भूसर सेव ।
मोहि समेत विरंतचि शिव । बच्च ताके सब देव ॥
सगुण उपासक परम हित । निरत नीति दढ़नेम ।
ते नर माण समान मम । जिनके द्विज पद प्रेम ॥नचौपाई ॥
विप्र बंश की अस मथुताई । अभय दोइ जो हुमहिं डराई ।
शापत ताड़त पुरुप कईता | विमर पूज्य झस गावहिं सता ॥पूजिय त्रिम शील गुण हीना । शूद् न गुण गण ज्ञान भवीना ॥
_ पुन्य एक जगमह नहिं दूजा । मन क्रम बचने बिभ्र पद खूजा ॥
''साधुकुक तोहि पर द्ानि देवा । जो तजि कपट कर द्विज सेचा ॥बननननााय दे कूँदकीनाणाणाणाण
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