श्री प्रवचनसारटिका खंड - ०२ | Shri Pravachansar Tika Khand-ii

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : श्री प्रवचनसारटिका खंड - ०२ - Shri Pravachansar Tika Khand-ii
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about ब्रह्मचारी शीतल प्रसाद - Brahmachari Shital Prasad

Add Infomation AboutBrahmachari Shital Prasad

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
२०३११२ २९३ ३३4९३१ '३४ ३८ फह २५० का २५३ २५८ ६९ न्घ्थक 2१9४०की रुप २८३ ८४ ८५ २८७ २९०है. श्घ१५ ४श्‌ 5 १९ ० (दे ६ १९, रे ६१५रू०डू३जगदमिल !जगदमिल समव इन्द्र त्तेषां कथाय: कारिण्या अत्पित्तफूठिमा पृव पुरुपाका संस्कार चित्तको योग निणिन्त च्छुद्र सो आकर लोग बाथर निछि वालशुद्ध जगदेमिठ संभव इंदिय तेषां कपाय: करिप्या अत्थित्तणिच्छिद पननाया कालिमा भव पुरुषपाकार सप्तार चित्त हो प्रयोग निमिन्त च्छ्द्ध स़द्दो शाज़ार लोक बादर्‌ तिछ वास्तव




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now