लोकवार्ता की पगडडिया | Lokvarta Ki Pagdandiya

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
11 MB
कुल पष्ठ :
260
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)'.. लोकनादयः ऐतिहासिक दर्शन
...... : लोकनाटूय का ,लोकमंच से सम्बन्ध है । इन दोनों से
'. . लोकरंग प्रस्तुत होता है 1. लोकनाट्य .का श्राघार, कोई लोक-
नाटक होता है श्रौर यह प्रतीत .होता है. कि लोकमानस . से
_ आ्रोतप्रोत लोकनाट्य झ्रनादि.प्रायेतिह्दासिक काल में जन्म लेकर
काल;के विशाल. अवसेधों को चीरता हुमा राज , तक लोक में
_ प्रचलित है घर उसी लोकनादूय के ऊपर नाटक, श्रौर. उसका
. नाट्यशास्त्र खड़ा . होता, है ।
वस्तुत: श्रत्येक शास्त्र का निर्माण कला-विकास: के उन्नत
: शिखंर पर पहुंचने .के' उपरान्त हो होता है । भारतीय नाट्य-
शास्त्र इसका अपवाद नहीं है। कितना विलक्षण कला-विकास
शरीर उसका सूक्ष्म निरूपण श्रौर विश्लेषण नाद्यशास्तर में. है
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