लोकवार्ता की पगडडिया | Lokvarta Ki Pagdandiya

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Lokvarta Ki Pagdandiya by डॉ. सत्येन्द्र - Dr. Satyendra

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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'.. लोकनादयः ऐतिहासिक दर्शन...... : लोकनाटूय का ,लोकमंच से सम्बन्ध है । इन दोनों से '. . लोकरंग प्रस्तुत होता है 1. लोकनाट्य .का श्राघार, कोई लोक- नाटक होता है श्रौर यह प्रतीत .होता है. कि लोकमानस . से _ आ्रोतप्रोत लोकनाट्य झ्रनादि.प्रायेतिह्दासिक काल में जन्म लेकर काल;के विशाल. अवसेधों को चीरता हुमा राज , तक लोक में _ प्रचलित है घर उसी लोकनादूय के ऊपर नाटक, श्रौर. उसका . नाट्यशास्त्र खड़ा . होता, है ।वस्तुत: श्रत्येक शास्त्र का निर्माण कला-विकास: के उन्नत: शिखंर पर पहुंचने .के' उपरान्त हो होता है । भारतीय नाट्य- शास्त्र इसका अपवाद नहीं है। कितना विलक्षण कला-विकास शरीर उसका सूक्ष्म निरूपण श्रौर विश्लेषण नाद्यशास्तर में. है०




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