कर्म ग्रन्थ भाग - 2 | Karm Granth Bhag - 2

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : कर्म ग्रन्थ भाग - 2  - Karm Granth Bhag - 2
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about मिश्रीमल जी महाराज - Mishrimal Ji Maharaj

Add Infomation AboutMishrimal Ji Maharaj

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
हू हुई. 5देशविरत युणस्थान में बंध प्रकृतियो की संख्या जी देशविरत गुणस्थान में वंधविच्छिन्न प्रकृतियो के नाम ्् प्रमत्तसंयत गुणस्थान मे बंध प्रकृतियो की संख्या दरगाथा ७.८ दुशापिय प्रमत्तसयत गुणस्थान में बंध विच्छिन्न प्रकृतियो के नाम ६ अप्रमत्तसंयत गुणस्थान मे वधयोग्य प्रकृतियो की संख्या घ्घ अप्रमत्तसयत गुणस्थान मे वधप्रकृतियो की भिन्नता का झ्दु स्पष्टीकरणगाथा €, १०: ११ ८-७३ अपूर्वकरण युणस्थान में वध प्रकृतियो की संख्या ७० अपूर्वकरण युणस्थान के सात भागों मे वध विच्छिन्न- ७० प्रकृतियों की सख्या व नाम अनिवृत्ति वादर गुणस्थान की वध प्रकृतियो की सख्या ७१ अनिदृत्ति वादर गुणस्थान के पाचे भागों मे वध विच्छिन्न ७२होंने वाली प्रकृतियों की संख्या व क्रम सुकष्म सपराय गुणस्थान की वध योग्य प्रकृतियो की सख्या.. ७२गाथा १२७४-७९ सूद्म संपराय गुणस्थान में वघ प्रकृतियो के नाम ७ उपणातमोहू, भीणमोहू, सयोगि केवली गुणस्थान में वध ७ प्रकृति सख्या और कारण अयोंगि केवली गुणस्थान में अवध व उसका कारण ७५ याथा १३ ७६-नप्रदय व उदीरणा का लक्षण्तमं रे #2.. /2नानास्यतया उदय योग्य प्रकृतियों की सख्णय व कारण डमच्यत युणन्थान में उदय योग्य प्रकृतियारी




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now