श्री भगवती सूत्र पर व्याख्यान | Shri Bhagvati Sutra Par Vykhyan

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Shri Bhagvati Sutra Par Vykhyan  by शोभाचन्द्र - Shobhachandra

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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| ११३७]. सूर्याधिकारचेन्नानिकों ने भी यह स्वीकार [किया हक्क प्रकार का शान ऐसा दतां दे कि स्यादय: के पटल तक ठट्रता है । सूयादय दने पर मिंट जाता दूं । कभी-कभी पुसा भी पता क्रि सदा सप्राणजारद दीं उस समय श्रगर सुयादय द। जय ता ज्ञत्ते इए प्राणरद्द जाते इं |ऋतु ् राग के क¡; जव. शात-मिरजाप-घारं सराव श्नमो चाज द्रिका दन लगणः तव कहाजाताषह क्रि सथ तपरा! टमा क नाप्र. ` तप्रति^ है } भल्ते दासय मव्डल न द्विष पडतापरन्तु.ठखीरा-लरीःचीज घर दिखांइं देंदी हो, नप याद 5 जाताः किंःसूय तथ रहा द । ततत्पय यह दं क गमक प्रभाव स जव सूये दा को नए कर दत्ता दे तथा यारा से घाराफ पेस्तुए मीं नजर पड़न लगती ६, तथ सय ये का तपना कदराता-।ॐ न, यह छूमे का सामान्य-विशेष: घी: दिखाया गयालक्षन सूय, कर प्रकाश करता है, इस सक्यन्घ में “गंततम स्वामी ने क्षेत्र के लिए प्रश्न किया दै। *` ~ गोतम स्वामी के प्रश्न के उत्तर में भगचान्‌ ने फर्माय। या खूय, क्षेत्र को स्पशें करके प्रह्माश करता दे? धिना प्रकाश ऊँये नददीं । इस उत्तर पर यदद जिश्नासा दो सकती हू कि स्‌ः तो ऊपर है, फिर चंद प्रकाशित दान चाट च्त्र. का सपश किसमकार करता दे ! इस्ल का समाधान यद हे किससे नागिनश्र अह सत्ये, परन्तु उको किरणै छोर प्रकाश तो नीचे ¶दा दे). सूयः. किरणे रोर घंकाशें, यद्र दीनस 'मिन्नभिन्न चस्तुप नहीं हैः । अरस -पकष्लमय.न दोता, तो+ ®“ इभ




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