हिन्दी व्याकरण | Hindi Vyakaran

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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( १६ ) समाज की शैक्षणिक श्रावश्यकता--वर्गगत सामू्िक जीवन--वर्ण विधान के विरुद्ध श्रान्षप--वर्ण विधान, संसार के नक्शे मे-जन्मना और कमेणा--वर्ण व्यवस्था, सामाजिक सहयोग का प्रेरणा विन्दु, न्यायाधीश के रूप में; वर्ण व्यवस्था और प्रतिस्पर्था--वर्णाश्रम--कतयुग श्रौर वर्णाश्रम-- गांधीजी की नयी योजना: नयौ तालीम : समध्य का अचूक समाधान-- नयी तालीम में कार्य और उद्योग स ही ज्ञानी सिदधि--गांधीजी की योजना : विश्व धर्म-- ` ६१-७८, १६२-१७९ (५) भारतीय कुटुम्ब व्यवस्था, संयुक्त पग्र, वैयक्तिक माहम-- संयुक्त परिवार सामृदिक कपि का तंठृलित ल्य द-विनध्रनी श्रौर भू-दान-यक्ञ-- सामूदिक सूम्पब्नता के लिए वंयक्तिक वमाना लल्री--श्म की यति- हीनता और नवभारत की उत्पादन विधि--संखुक्त व्यवस्था समाज का कतंघ्य विधान है--नवभारत की श्रम नीति-- ७६-८४, १७६-१८७ ( र.) वकारी-- (१) प्रारम्मिक--सवसुयोग्यों का जीवनाधिकार--भोजना गार में भूख पीडा-- - यंत्रों की मर्या कायम करने की जषरत-- नयी तालीम चनाम वर्धा पद्धति-- ८६-८ट८; १८७-१६० इ. सच्चा श्रम विधान--दनावश्यक और च्रनुत्पादक कायं ( १६० ट )-- ८९; १६०-९६.१ (३) जनव्रृद्धि श्रौर वकारी, छृपि जन्य बेकारी, बेरी श्रीर्‌ आमोद्योग, वणगत श्र धार्मिक वेकारी, सरश्नरी श्रौर व्यापारौ वेकरारी, राजस्व और वकारी--श्वम प्रधान उत्पादन श्र ्मदगी--नलमय उसादन बनाम साम्पत्तिक विनाश--कलमय उत्पादन बनाम बेकारी--स्वदेशी समाज -- सरकार ग्रौर समान-- ६०, १६१-१६८ (ल) सम्पत्ति योर स्वाभित्व-- स्वामित्व से ही सम्पत्ति का स्वरूप स्थिर होता दे--सम्पत्ति और व्यक्तिगत स्वामित्व--विश्व के साम्पत्तिक चक्र में व्यक्ति का खाथं और पुरुपार्थ-- वैयक्तिक स्वासित्व का विरोधामास--वेयक्तिक या सामूहिक स्वामित्व-- सामूहिक स्वामित्व--सम्पत्ति का सच्चा मूल्य--सामूहिक विधान में साम्प-




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