हिंदी व्याकरण | Hindi Vyakaran

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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( ९१२ ) बाबू जगज्ञाथदास ( रत्लाकर ), बी० ए० । बाबू श्यामसुंदरदाख, बी० ए० । पंडित रामचंद्र शुङ्क । इन सव सज्जने के प्रति हम अ्रपनी हार्दिक कृतक्षता प्रकट करते हैं। पं० महावीरप्रसाद द्विवेदी के हम विशेषतया ऋृतज्ञ हैं, क्योंकि झापने हस्त-लिखित प्रति का झ्रधिकांश भाग पढ़कर अनेक उपयोगी सूचनाएं देने की कृपा और परिश्रम किया है। खेद है कि पं० गोविंद- नारायशजी मिश्च तथा पं० श्रविकाप्रसादजो वाजपेयी समयाभाव के कारश समिति की बैठक में योग न दे सके जिससे हमें आप लोगों की विद्वत्ता और सम्मति का लाभ प्राप्त न हुआ | व्याकरण-संशोा- धन-समिति की सम्मति श्रन्यत्र दी गई है | अंत में, दम विज्ञ पाठकी से नम्न निवेदन फरते हैं कि आप लोग कृपा कर हमें इस पुस्तक के दोषों की सूचना अवश्य देवें। यदि ईश्वरेच्छा से पुस्तक का द्वितीयाबृत्ति का साभाग्य प्राप्त द्वोगा ते उसमें इन दोषों का दूर करने का पूर्य प्रयज्ञ किया जायगा । तब तक पाठक-गण कृपा कर “हिंदा-उयाकरण”? क॑ सार का उसी प्रकार ग्रहण करे जिस प्रकार-- संत-हंस गुण गदर पय, परिहरि वारि-विकार । गढ़ा-फाटक, ; जबल्लपुर; | निवेदक--- वसंत-पंचमी, | कामतापअसाद गुरु स० १६७७




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