विलायती उल्लू | Vilaayatii Ulluu

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Book Image : विलायती उल्लू  - Vilaayatii Ulluu
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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' डिनरदाय ! बजाय किताबके एक लकड़ीका डाज जो कम्बख्त रंगोन जिल्दोंकी शकलका बना हुआ था. भड़भड़ाकर निकल्त याया तर मेरी खोपड़ी तोड़ता-फोड़ता घड़ामसे मेन्नपर झा गिरा। उल्टी हुई दाबातोंसे रोशनाइकी नदी बह चली । लोग मेरी तरफ दोड़ पड़े । मुझे कुछ न सूका तो सर मुकाकर भट अपने रेशमी रूभालसे सेजपरकी रोशनाई साफ करने लगा । इतनेमे ही खाना खानेकी घरटी घनघना उठी। लोगोंका व्यान उधर बट गया । पिस्टर फ्रर्डली भी मुके दम-दिलासा देकर कि कुछ नुकसान नहीं हुमा रौर मुमे अपने साथ खानेक्रे कमरेमें चलनेके लिये कदकर शोरोंके पोछे चल्नते हुए ।प्रव जाना कि पदलो घण्टी जिसने मुझे यकायक घवबड़ा दया था, बह सिफं यह वतानेके लिये थी कि डिनरमें बस अव साध घर्टेकी देर है ।/ लोगोंखे पिछड़ जानेके कारण में खानेके कमरेमें पहुँचनेके बदले एक रेजे कमरेमें घुस पड़ा, जहां बड़ी अम्मा यानी मिस्टर फ रुडल्ीकी मां लुढ़कनेबाली कुषीं-ररण्णपण् ०87 में घंघो हुई द्ाथमें दूधघका भरा कटोरा लिये झपनो प्यारी बिज्ञी पुषीको गोदमें बिठाये दूध पिल्ञा रद्दी थी श्लौर नीचे टामी दुम हिना- हिज्ञाकर बुढ़ियाके मोतकी दुझाएं मांग रद्दा था। तुरन्तसात




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