हिंदी निबन्ध | Hindi Nibandh
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
8 MB
कुल पष्ठ :
106
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)११त्रा जाता हो। रूस की माया रूस ही जाने, . विषय को यहीं,
समाप्त करं |मेरी यह पुस्तक हिन्दी निबन्ध पर कोदईं॑विदरतापूरं खोज-ग्रन् नरह,
न श्रम्तिम शब्द होने का मेरा दावा है | मेरा प्रयास हे कि कुछ तथ्य, जो मुझे
श्रपने पढ़ने लिखने के सिलसिले में इस्तगत हुए, मैं श्रन्य सहदर्यों तक पहुँचाएँ ।
साहित्य का सत्य किसी एक व्यक्ति या गुर की मोनोपोली नहीं है, ऐसा मेरा
विश्वास है; क्योंकि वह श्रस्तत। जीवन का सत्य है, नो नित्य गतिशील, निरन्तर
भूयमान है । गति का श्राधिक्य कभी-कभी स्थिति का श्राभास पैटा करता है, पर
जसे मैंने श्रपनी निशन्धों की पुस्तक खरगोश के सींग” में कहा हैं श्राभास को
सचाई मानलेने का हमारा बाल-स्वभाव सावजनीन हे।नई टिल्ली
५-४-५५ प्रभाकर माचवे
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ajabirali07
at 2019-06-09 05:06:28"C.I.D"