किन्नर देश में | Kinnar Desh Main
श्रेणी : संस्मरण / Memoir

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutRahul Sankrityayan
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
17.41 MB
कुल पष्ठ :
483
श्रेणी :
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about राहुल सांकृत्यायन - Rahul Sankrityayan
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)डाझवगतलेमे प्रवन्ध पा । नादर लेलपर सात
ग्डॉ चालोके लिये तो बह रथान गम है, लाग एस दावे सर रद थे.
ड श्र घन रसपर # मीस था
सानों यहाँ प्राण सुखानेवाज्नी लू चल रही ₹। रामपुर १२ मॉल था.
फ
चचना छोडेपर था, फोई नदी जप पी । ढापइरफे
्ौर गर्मी लग रही थी. किन्तु वेगले के फमरग दुवते रो जी
छायाने अपना छपर फिया । कुर्पीपर बठ दी थे. कि दा
कारडेबल सामये चाये | दूसरा समय रोता; दो सेमाच नहीं नो श्ाश्य
हाता । उन्होंने झाकर वाकायता ललापी दी चोर चाहा गादव
रद; लिये सजा ते सभी द्सियस सर्प
निभालनेपेलिये मुख्य प्रवघाधियारी (चीय एस्ज्क्यूठिय
जेजा है, विन्तु लोगोकों यह नाम लेना श्रासान नहीं हैं
इपलिये वह उसे पुराने ही नाते पुकारते है । सेने दीवाने सादिवक
चन्युचाद देते लिपाटियोदिलिये कोई सेवा न हॉलेपर स्ेद य्रकद
प्र
मे न
पे
4
व |
डे ही
सं,
/उा..
न्तु लोगोकों फलकी तथा याद रानी ईद, ज
उन्का पा बनना हो; नहीं तो उन्हें फलकों नदी सना फिक
किन्दु दिलोरी शक्ति
क रहती हु । हमारे पास रायसाहिवका दिया छुले सालका
थ रमें एूछुनेरर सने छाड़॒लासेफे लिये कह दिया ।
इन समय यहीं हद्का साजन अधिक श्रठुकूल जान पड़ा ! वेंगलेमें
शी लगी खिड़किगेके वाहर घनी जाली लगी देखकर कुछ अनकुस
होता था, दरार यद वात सारे तिव्वत-हिस्टरतान सड़कके। डाक
वेंगलाम थी, किन्तु इसका लाभ तद मालूम दुआ, जव द्गले महीनों
स कंडके कंड द्ाक्रसण करसे लगे । से दी सेव छील-
चार स्वानन हीं लगा था, कि ज्वालापुरद पडाजी झा पहेँचे, व टमारी
ग्रेताला नालामे कर रहे थ, दौर उसी शत सशन घरसे । उन्हे भी दो
सब देकर हाथ जोड़ लिया । पदड़ोंने शिक्षित लोग वचन सिंडे रहते है
# (६
कि
1
घट
पद
* अ/
८
|
पड
मी 2
24
डर
?
व्यय
श्र
प्स
1
2
हनी
हू
थम
था
पथ
टी
हि
User Reviews
No Reviews | Add Yours...