भारत वर्ष का इतिहास | Bhart Varsh Ka Itihas

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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तीसरा प्रकरणनरक हडुसरनराश्यदा विकास ।साधारणतः जातीयताम थे पॉच यासे संभुक दें ! (१) देश (२) घ्मे (४) सादा (४) ुलिडास , ४) राजनीतिक ररिकना | ये पांच! झयद! उनमेंसे कुखुकें पिरामान होनेसे सातीयता यनती है 1 यह धावरस्यर नहीं कि ये पांच हो पायीयनारि सिर चिद्यमान हों । ऐसा भी हो सकता है दि सदी उनसे एक यलवाद रीतिपर विद्यमान हो वहां भी एक सार्नायताका सम्यन्थ उम्पन्न हों जाय । प्रायः लोग इंस फर कई देने हैं कि मे।मोलिक सोमा जातीयताका कारण केसे बन सरती है। परन्तु यह बात सय है कि सनुप्यका ध्रपने पदतो, नदियों इस या सौगरोशिय. यूर्चे। श्र फूलें: अदिते स्वाभाविक मेम होनेके कारण उसमें मामा 1 जातीयताका भाव उत्पन्त हो साता है । चमक विरोध जातिकों खणिइत कर देना दे जैसा कि भारतवर्प् साय शोर सुगलमान ! कभी कभी घर्मेनविरोध हेनिपर भी जातीयता! बनी रहती है । सब सं!घहवीं शताब्दीके झन्तमें सेपनने इं्लेरटपर पगदों समानता . धार्मिक विरोधके कारण झाकरमण किया तो ईग्लेणडके रोमन कैशेलिक चचकें साननेयाले भी अपने सइधर्मी स्पेनके साकामकोके विरुद्ध अपने देशके रखणाये लहते रहे । धर्मका एक होना मुसला- मानस. झति दृद सम्बन्ध स्थापित करता है. क्स्तु दरिवर्ष( यूरोप ) ईसाई होनेकें शतिरिश किननी दी सिन्न सिस जातियोंमें विभस्त है । तर्मनी शोर इंग्लैटइके युद्धम भमरोकाकों सदानुभूति स्वभावतःंप्रजाके साथ थं! । झायजैं रद के झन्दर जततीयताका नारा करमे के क्षिये झाग्लस्थानने वहीं दी सापाका नाश करके झांग्ल-भापाका उसके स्थान मरचलित भाप हे के किया ।. जर्मनीने प्रांसर कद मास जीतकर यहांसे फ्रेस्च होना सापाका सस्तिय मिटानिको चष्टा की । इस सम्बन्ध एक मनोहर घटनाका उरलेस करना झनुचित न होगा ।. एक फ्रेंच कम्य किसे पाइशालाम पढ़ते भी. लमनीकों राजमहिपीने उस पाउशालाकों देखा पर थे उस कन्पापर चढ़ी प्रपन्त हुई । कन्पाने उनसे प्राथनां को कि 'हमारी हटदीहा अंके




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