बया का घोंसला और साँप | Baya Ka Ghonsala Aur Sanp

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
142 MB
कुल पष्ठ :
194
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)रोते हुए. नन््हें को अपनी गोद में लिए हुए पल्नैंग पर लेटी हैं
লল্তা सो नहीं रहा है और प्रभा जी उसे सुलाने के प्रयत्न में हैं | बरामदे
. मेँ गीता तस्वीरों से भरी हुईं कोई किताब उलट-पुलट कर देख रही हैउस की घ्ंघराती अलकें बार-बार उस के मुंह तक आ जाती हैं ओर वहहै कि
गे हई ; अलके अनायास कुछ चरणो के जिए उस के सरके घघराले
बालो से सिमट जाती हैं | चौके में एक ओर रत्ती बैठी हुई श्राया
_ गुँथ रही है और दूसरी ओर आग के सामने विधवा पारो बुआ बैठी
खाना बना रही है | बुआ पसीने से तर है और वह बार-बार अपने सते-
द आँचल से मंह के पसीने को पोछुती हुई सोच रही है---हाय ! अब
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