अफनासी निकितिन की भारत यात्रा | Aafnasi Niketen Ki Bharat Yatra

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Aafnasi Niketen Ki Bharat Yatra by डॉ नारायणदास खन्ना - Dr. Narayandas Khanna

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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दिया श्रौीर चमचमाते टृए झरने की कलकल के साथ गाना. शुरू कर होड़ लगाते हुए दिया - श्रासमान में वाज़॒ उड़ा वोल्गा की धारा के ऊपर हहराती लहरों के ऊपर इठलाती हंसिनी के ऊपर चकराता , मंडराता , तिरता ! लोगों ने भी तेज श्रावाज़ में गाना श्रारम्भ किया - नील गगन में वाज़ उड़ा , में वाज़॒ उड़ा ! निकीतिन का चेहरा लाल हो उठा, गरदन की रगें तन गयीं थे श्रांखें साहस श्रौर शरारत से चमक उठीं। उसने फिर गाना शुरू किया - नील गगन 2-1576 १७




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