अफनासी निकितिन की भारत यात्रा | Aafnasi Niketen Ki Bharat Yatra

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
1854.67 MB
कुल पष्ठ :
608
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)दिया श्रौीर चमचमाते टृए झरने की कलकल के साथ
गाना. शुरू कर
होड़ लगाते हुए
दिया -
श्रासमान में वाज़॒ उड़ा
वोल्गा की धारा के ऊपर
हहराती लहरों के ऊपर
इठलाती हंसिनी के ऊपर
चकराता , मंडराता , तिरता !
लोगों ने भी तेज श्रावाज़ में गाना श्रारम्भ किया -
नील गगन में वाज़ उड़ा ,
में वाज़॒ उड़ा !
निकीतिन का चेहरा लाल हो उठा, गरदन की रगें तन गयीं थे
श्रांखें साहस श्रौर शरारत से चमक उठीं। उसने फिर गाना शुरू
किया -
नील गगन
2-1576 १७
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