अन्नपूर्णा धरती | Annapurna Dharti

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Annapurna Dharti by कृष्णचन्द्र - Krishnachandra

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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दे... .. महाद्वीप के एक छोर से द्सरे छोर तक जिन लोगों को श्रमेरिका के नये विस्तीरणं महाद्वीप में कृषि करनी थी ये चाहते थे कि वे अपनी ज़मीनों पर ही अपने घर बना सकें । वे ऐसे देशों से भ्राये थे जहाँ उनके पूर्वज साधारण किसान दूसरों की ज़मीन जोतने चाले या जागीरदार सामन्तों के साथ बँघे हुए गुलाम थे । वे श्रौर उनके ऐसे वर्ग भेद पूर्ण समाज में रह चुके थे जहाँ बहुत कम लोग उन्नति कर सकते थे श्र जहाँ परम्परा से भूमि का स्मामित्व उससे उत्पन्न सुरक्षा और प्रतिष्ठा कुछ ही विशेषाधिकार प्राप्त व्यवित्तयों के लिए सुरक्षित थी । यूरोप से श्राये झ्रावासियों के लिए श्रपने निज के खेत फार्म का मालिक होना एक बहुत वड़ा जादूभरा झ्राकषंण था । श्रमेरिका में नया झ्रानेवाला व्यक्ति पश्चिम के सूर्य के उज्ज्वल प्रकाश में अपने लिए एक नया श्रवसर देखता था । इस नई दुनिया में किसान श्रपने लिए ज़मीन कंसे प्राप्त कर सकते थे कि वे उसे जोत भी सकते श्रौर उसके मालिक भी होते ? इसके कई तरीके थे श्रौर हरेक की अपनी अलग कहानी है । कप्टेन जॉन स्मिथ ने विलिमय स्पेन्स को जो अपना निजी श्रमेरिकन फामं चलानेवाला पहला संग्रेज् था एक ईमानदार साहसी श्र उद्यमी आदमी कहा है । स्पेस 1607-1608 के जाड़ों में जेम्सटाउन वर्जीनिया कालोनी में झ्राया था । वहाँ के रिकाडड में उसका नाम मजदूरों में था । लेकिन वारह वर्ष का लम्बा भ्र्सा गुजरने के वाद कहीं वह निज का फार्म प्राप्त कर सका । जीवन के लिए संघर्ष करती यह छोटी-सी बस्ती जेम्स नदी के उत्तरी




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