कर्मग्रन्थ प्रथम भाग | Karmgranth Pratham Bhag

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Karmgranth Pratham Bhag by मिश्रीमल जी महाराज - Mishrimal Ji Maharaj

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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विषयानुक्रमणिका प्रस्तावना [पृष्ठ १७ से ७६ | कमं सिद्धान्त का पर्यालोचन जगत के मूलपदार्थ । . विकार का कारण | करम-शब्द के वाचक विभिन्‍न शब्द । कमं-विपाक के विषय में विभिन्‍न दर्शनों का मन्तव्य । कमं-सिद्धान्त पर आक्षेप ओर परिहार । ` आत्मा का अस्तित्व : सात प्रमाण । आत्मा के सम्बन्ध में कुछ ज्ञातव्य) कर्म का अनादित्व । अनादि होने पर भी कर्मो का अन्त संभव है । आत्मा और कर्म में बलवान कौन ? कम-सिद्धान्त का अन्य शास्त्रों से सम्बन्ध । कर्म-सिद्धान्त का साध्य : प्रयोजन । कर्म-सिद्धान्त विचार : ऐतिहासिक समीक्षा । जनदर्शन में कर्म-सिद्धान्त का विवेचन । जनदर्शन का विश्व सम्बन्धी दृष्टिकोण । - कर्म का लक्षण । मावकमे ओौर द्रव्यकमं का विरोष विवेचन । चार वंधका वणेन 1 `. | कमं की विविध अवस्थाएं । वंध, उदय-उदीरणा, सत्ता का स्पष्टीकरण । `




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