छान्दोग्योपनिषद | Chhandogyopnishad

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : छान्दोग्योपनिषद  - Chhandogyopnishad
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about घनश्यामदास जालान - Ghanshyamdas Jalan

Add Infomation AboutGhanshyamdas Jalan

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
( १४ }तृतीय खण्ड १. पाञ्चाटोकी समामे उ्वेतकेनु २. प्रवाहणके प्रदन ३. प्रवाहणसे पराभूत उेतद्ेतुकरा अवने (नाके पाम्‌ जाना ४. पिता-परुचका प्रवाहणके पाम जाना ध ५. प्रवाहणका वरप्रदानचतुथं खण्ड.६. पञ्चम प्रका उत्तर ७. टोकल्पा अथिविन्यापञ्चम खण्ड९८. पजन्यरूपा अथिविनच्रा «४ २षष्ठ खण्ड२९. प्रथिवीरूपा अविद्या হল এसप्तम खण्ड ७०. पुरुपरूपा अमिविद्या | অগুল खण्ड ७१. स््रीरूपा अमभिविद्यानवम खण्ड७२. पश्चम आहुतिमे पुरुपत्वको प्राप्त हुए. आपकी गति * *दरशम खण्ड ७२. प्रथम प्रभका उत्तर'७४. तृतीय प्रश्नका उत्तर নি ( देवयान ओर धूमयानका व्यावतंनस्थान )१७५. द्वितीय प्रश्नका उत्तर ( पुनरावतनका क्रम )१७६. अनुशयी जीवोकी कर्मानुरूप गति हाफ १७७. चतुर्थ प्रश्नका उत्तर( अशास्तरीय प्रवृत्तिवालोंकी गति ) १७८, पोच पतित कक १७९, पश्माप्मिविद्याका महत्त्व °४७९२* ४७८क হট) ক४८५क ८ ९ ©५०५ ५.०७कर ५ १ ©५११




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now