विनय पिटक | Vinay Pitak

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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भिक्ष-नियम स्थविरवाद मूलसर्वास्तिवाद ६--सेखिय ७५ ११९२ 3--ओधकरण-समथ 13 ७ २११ २७१ इससे मालूम होगा कि स्ववरथदक विनयकी अपेक्षा मूलसर्वास्तिवादकं विनयमें भिक्षुओंकं २५ और भिक्षणियोंक ६० नियम अधिक हैं। खन्धक और विनयवस्तुकं मिलानेपर भी मलसर्वास्ति- वादमें अधिक परिच्छेद मिलते हें। जिस प्रकार स्थविरवादियोंका खन्घक मसहावग्ग और चल्लवग्ग --क्षुद्रक-वर्ग में बँटा है वैसे ही मूलसर्वास्तिवादियोंका भी महावस्तु क्षद्रकवस्तु -चुल्ल-वत्थु दो भागोंमे बैंटा है । क्षुद्रकवस्तुके बाद आये दो उत्तरग्रंथ तो क्षुद्रकवस्तुके ही परििप्ट हैं। पाली महा- बग्ग चुल्लबग्ग और महावस्तुके परिच्छेदोंकी तुर्ना इस प्रकार है-- महावग्ग ८--पहास्कन्शक +--उपोसथस्कन्धक ३--वर्षपिनायधिकास्कन्घधक ध--प्रवारणास्कन्धक +---नमंस्कन्घधक ? --भष्ज्यस्कन्घ्रूद् 3नकरटिनस्कन्थक ८--चीवरस्कन्धक | ५ --चम्पेयवस्तुस्कन्धक १ ०--कौणम्बकस्कन्धक चुत्लवग्ग १ --क्मस्कन्धक २--पारिवासिकस्कन्घक २-एसमच्चयस्वन्धक #--णमथस्कन्धक ए-ाएमुद्रकवस्तु । स्कन्धक ६--णयन-आसनस्कन्धक । .. ७-संघभदस्कन्घधक ८--ब्रेतस्कन्घक ५---प्रातिमोक्षस्थपनस्कन्धक मह्ावर्तु १--प्रचज्यावस्तू -एउपोसधवस्तु ८--वर्पावस्तु २--प्रंवारणा वस्तु ५-चर्मवस्तु ६--भंपज्यवस्तु | ७--चीवरवस्तु | ८--करटिन-आस्थान-वस्तु ५-कोगम्बकवस्तु १ --व्मवस्तु १ १--परवासिकवस्तु १ रलपुदगलदस्तु | १३-उणमथवस्तु | १६--अधिकरण-वस्तु £५--णयनासनवस्तु ५५-रसंघभदवस्तु थथ १ ८--प्रातिमीक्ष स्थपन वस्तु थ.. रस प्रकट्र चुल्लवग्गके अन्तिम २ स्कंघकोंको छोठ बाकी सभी स्कन्घक महावस्तुमे आ गये हैं । चुल्लवग्गक अवशिष्ट स्कधघक क्षुद्रक-वस्तुष्में आ जाते हैं और इनके अतिरिक्त वहाँ बहुतसी और बातें हें. जो कि पाली-विनय-पिटकमें नहीं मिलतीं । इसमें कथायें छोटी छोटी हैं इसलिये इसे क्षट्रकवस्तु-स्कंधक कहा गया है । रैमुलसर्वास्तिवादके विनय-पिटकका भोट-भाषानुवाद १२ पोथियों 5दुल-व क ख ग ड च छ ज डा त थ द न प में हुआ है जिनमें-- महावस्तु . क ख ग डा




User Reviews

  • Dharmendra

    at 2019-11-16 12:40:16
    Rated : 10 out of 10 stars.
    "Nice Boobs"
    This book is very important for Buddhists.
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