अलबेरूनी का भारत भाग 2 | Al-Biruni Ka Bharat Part 2

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पं संतराम - Pt. Santram

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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विषय-सूचो । ११ सम्बन्ध--कट्प के भारम्भ के नियम--छोटे झार्य्यभट पुलिश श्रौर बड़े श्राय्यभट की कल्पनायें--३३६--३४० बयालीसवाँ परिच्छेद । चतुयु। की युगों में बांट शोर युगों के विपय में भिन्न भिन्न सम्मतियाँ । विप्णु-घर्म झार श्रह्मगुप्त के श्रनुसार चतुर्युग के श्केले श्रकेले भाग--इकहरे युगां की संस्थिति--त्रह्गुप्त द्वारा दिये हुए आर्य्यभट तथा पुलिश के ध्रवतरण--पोलिस का नियम--इसकी समालोचना-- पुलिश गिनता है कि वर्तमान कत्प के पहले न्रह्मा की कितनी श्रायु वोत चुकी है--इस गणना की समालोचना--श्रार्यभट पर ब्रह्मगुप्त की कठोर श्रालोचना--सीर वर्ष की मिन्न भिन्न लम्बाइयाँ--३४१--३४७ तेंतालीसवाँ परिच्छेद । चार युगां का श्रोर चौथे युग की समाप्ति पर जिन बातों के होने की झाशा है उन सबका वर्णन । प्राकृतिक जल-प्रलय--हिप्पोक्रटीजू की बंशावली--चार कालों या थुगों के विपय में द्विन्दुओं के सत--कलियुग का वर्शन-मानो का कथन--विष्णुधर्म के श्रनुसार झृतयुग का वर्शन--चरक नाम की पुस्तक के अनुसार आयुर्वेद की उत्पत्ति--शराठस का झववरण-- श्रराटस पर एक धम्संपण्डित की राय--प्लेटो के नियमों से श्रव- वरण--४८--३४५७ चवालीसवाँ परिच्छेद । मन्वन्तरों पर । अकेशे अकेले मन्वन्तर उनके इन्द्र घ्रौर इन्द्र की सन्तान-- मन्वन्तरों के चिपय में विष्णु-पुराथ का ऐतिह्य । २५८--३६०




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