बलिदानों की प्रशस्ति | Balidanon Ki Prashasti
श्रेणी : इतिहास / History

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Add Infomation AboutShankar Sahay Saxena
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
14 MB
कुल पष्ठ :
562
श्रेणी :
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लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)'कानून का स्नातक) फी उपाधि प्राप्त षौ । यदि वे चाहते तो वकालत कर् यष्ट
बन यश्च, गौर रेश्वय प्राप्त कर सकफतेये परन्तु उनके हृदय मे, जो. देशसेवा फौ गहन
आवना विद्यार्थी काल से ही उत्पन होक्षाई+ भी বত वकालत ने पड कर নি ইহা
पैवा को अपनाया । उहोंने सामाजिक, शलणिक, राजनीतिक सगठनों के हारा अपनी
परभिलाषा को पूरा करते का प्रयल किया | वह काल बगाल में नव जागुत का काल
হা । बगाल में सभी क्षेत्रो मे नव चेतस्थ का उदय हो रहा था। युवक बालोचरण
तष मे जिस निष्ठा, सच्चाई, और ईमानलारो से विभिन सगठनों मे बाय किया उमसे
हा बंगाल के प्रस्येक क्षेत्र के छ्वीप सेताओ के विश्वास भाजन और प्रिय पात्र बन गए।
उनकी लगन झौर उत्कट सेवा की भावना वो देखकर प्रत्येक यह चाहता था कि वे
सके संगठन में सेवा काय करें।
५ জম লা কন ঈ ঘমাল কী ওয় ল্লাতিক্জাহী सभितियो मोर क्रातवारौ
शैगदोलन की शक्ति को क्षोण करने और देश की राजनीति में साम्प्रदायिक भावना
।आत्पान करने वी दृष्टि से वगाल वा विभाजन कर दिया तो समस्त देश में और
ए४वशेपकर बाल में राजनौतिक ज्वालामुलो फूट पद्म । देश भक्त भारतीयों वा मन रोप
इतर क्षोभ से भर गया । श्रौ घोय उषसे भलग न रह् समे उ-होने १९०५ मे राजनीति
हा प्रवेश किया । बृटिश साम्राज्य शाही ते भारतीय राष्ट्रीयता को चुनौती दी थी
हुए 'सका उत्तर भारतीय दश मवतों ने क्रातिकारों कायवाहियो का भोर अधिक तेज करके
था प्या। क्री कासीचरण घोप भी क्रा तिवारी दल और फ्रा तवारी आदोलन सें
है क्रिय हो गए ।1 जब तीज्र राष्ट्रीय भावना स॑ प्रेरित होकर क्र तकारो बुवक बदे मातरम का
ही य घोष करते हुए जुलूस निकालते हड्तालें करव ते और श्रग्नेज तथा दशद्रोही भार
को या को गोली का शिकार बयते तो यह स्वाभाविक था कि सरकार का दमन चक्र
हेः १ प्रच रूष धारण कर् उस भयकर दमन का सृष्टा भौर सचालक धमाल पुलिस
कठी 1 उच्च प्रभिकारी सी टेप्राट था। त्रास्तिकारियों ने उसको समाप्त कर देने का
छाप इ्चिय किया । जो दल उसकी ह॒त्या करने वे लिए चुना गया उसमें श्री बालीचरणऐप भी ये। उठ पर 'सी टग्नाट! की हत्या का प्रयत्त करने का आरोप लगाया गयाश्री अभियोग चला और णब महान त्रा तिकारी सूयसेन के नेतृत्व में चीदागाव केবী কাযা को क्रास्तिकारियों ने लूट लिया, चीटागाँद का तार और टेलीफोन काध्वम्ध काट दिया घीटागाँव फो लोडने वाली रेलों की पटरियाँ उसाड दी औरनमन जेक को उतार कर राष्ट्रीय ध्वज फहरा कर स्वत व्रता षयो घोषणा कर दीष्व र तीन হিনাঁ নন घटाया पर दृ सत्ता ममाप्तकरदी घो उन करान्तिकास्मिछती सहायता देने बे आरोप मे उन पर अभियोग चलाया गया पर भी कालीचरण परसीर रोप सिद्ध नही हो सके भा कालैपानी आदि का दण्ड तो नहीं दिया णा सका
क सरकार तै उनको ६ वर्षों के लिये लजरब द कर दिया।| अब पे भान्ति यज्ञ मे दौक्षित द्वो चुके थे उ होते भपता समस्त छीवन भारत
বব बे की दासता कौ श्रललामोकफो काट कर उसको स्वतत करन वे अनुध्ठान में॥ दिया था, অন্ত वे तव सै सतत क्राततिकारी दल में सक्रिय रहे । कारावास तथा
[एप कसी से मुषत होने पर भी ये राष्ट्रीय भादोलन झौर उप्र राजदीति में समय
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