सम्यक ज्ञानदीपिका | Samyak Gyandipika

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Samyakgyan Dipika(1946)dharm Das Ac.91 by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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यिपरमातृमातों नम्रतानजनमता नरोगी नसोगी नलोमी नमोहीनक्रोष न कामी फेर उनका मेरा मेल केसा केसे है इत्याटिक भाति हारा कोइंजीव आपकऊूंतिस मिड परमष्ठी त्तानमपिसे ह नताहे कदनादे ताकी येकल। तन्पयिनाकी सिरिके श्वगाटताकेददना रा अनेक हृष्टातह्वारा समाधान टेउंगा सोही कोई कृत्ञानदीपका पस्तगकू आ्यादिसें अतपर्यत भठे भावसे पढकरिके ब्यापः फाखर्वरूप स्वानुभवगम्य सम्यक्‌तानमयि स्वभाव वसू भथमतो न साचोरी काम कोध लोभमोह फषायाटिकसे के पश्चात्‌ दान पूजा ब्रतशीलजप तप ध्यानारिक- ৪৯৮৯ हक फेक के बंधदुःरयको कारण লজ, करिके श्रापका श्रापर নিব আনান मय सम्यक्‌ ज्ञा- नखभाव यस्तू कू दानपूजादिक कूभकर्म सर्वेथाप्रकारभिन्नसः




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