छोटा सा इंजन जो खींच सका एक ट्रेन को | CHOTA SA ENGINE JO KHEENCH SAKA TRAIN KO

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अशोक गुप्ता - ASHOK GUPTA

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पुस्तक समूह - Pustak Samuh

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वैटी पाइपर - W. PIPER

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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सकते हैं और उन्हें जो चाहिये वो वेटर लाकर देते हैं; और तो और मेरी ट्रेन में कुछ ऐसे भी डिब्बे थे जिनमें यात्री बॉहों-वाली गुद-गुदी कर्सियों पर बैठ कर बड़ी-बड़ी खिड़कियों से बाहर का नजारा ले सकते हैं. में तुम्हारी जैसी ट्रेन को खीचूँ? बिल्कुल नहीं!” शा 10 टव॑ड गाव॑ छऊा107 टवा5 का शगांती 720716९ था का 501 वबाधा-रीवां5 गाव 1006 0प्रा ण 89 [718९-21455 शंतव0०५४5. 1 छुपा 116 [1९९3 ण एठ0प्रश फरव्टव गण! 15




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