रंगमंच और नाटक की भूमिका | Rangamanch Aur Natak Ki Bhumika

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
3 MB
कुल पष्ठ :
204
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)“रप्मच प्रस्तायना &
स्वाटन पा सकते हैं, न उस युग की कला रुचि हा समझ सकते है और ने अपने
युग विशप का रगमच निर्मित कर सक्त हू । नाटक जस अति दाक्तियाली तथा
जीवात बाय कता माध्यम को वेवव हम साटिय पर एक सामाय प्रकार छव
विधा के ही स्वर स देखते रह जायेंगे ।नाटक मे नाटक की आत्मा की अनुधथूलि और उसके प्रत्यल हटाने के जिये
उमर रगमच का सम्पूए सत्य भाव चातिय ।
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