कबीर ग्रंथावली | Kabir Granthawali
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
77.46 MB
कुल पष्ठ :
617
श्रेणी :
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लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
कबीर या भगत कबीर 15वीं सदी के भारतीय रहस्यवादी कवि और संत थे। वे हिन्दी साहित्य के भक्तिकालीन युग में ज्ञानाश्रयी-निर्गुण शाखा की काव्यधारा के प्रवर्तक थे। इनकी रचनाओं ने हिन्दी प्रदेश के भक्ति आंदोलन को गहरे स्तर तक प्रभावित किया। उनका लेखन सिखों ☬ के आदि ग्रंथ में भी देखने को मिलता है।
वे हिन्दू धर्म व इस्लाम को न मानते हुए धर्म निरपेक्ष थे। उन्होंने सामाज में फैली कुरीतियों, कर्मकांड, अंधविश्वास की निंदा की और सामाजिक बुराइयों की कड़ी आलोचना की थी। उनके जीवनकाल के दौरान हिन्दू और मुसलमान दोनों ने उन्हें अपने विचार के लिए धमकी दी थी।
कबीर पंथ नामक धार्मिक सम्प्रदाय इनकी शिक्षाओं के अनुयायी ह
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)[ ५ _
स० प्रति का विवरण : परिचय, लिपिकाल, श्र कार, पाठ संबंघी
विज्षेषताएं कि ..... १४२-१४४
गुण० प्रति का विवरण : परिचय, लिपि-काल, झ्ाकार, छंद,
संकलित कवियों तथा सँतों के नाम, विशेषताएं --राजस्थानी-
प्रभाव, फ़ारसी लिपिजनित विकृतियाँ, नागरी लिपिजनित
विकृतियाँ, पुचराबृत्तियाँ कक ८... रै४४-१४६
१४ : प्रतियों का संकीण-संबंध | प्र० १४७-२१३ |
१, दा० तथा नि० का संबंध : फ़ारसो लिपिजनति विकृतियों का
साम्य नगरी लिपिजनित विकृतियों का. साम्य, राज-
स्थानीप्रभाव-साम्य, पंजाबी प्रभाव-साम्य, पुनरावृत्तियों में
साम्य, दार या दा४ तथा नि० का विशेष नेकय्य, दा
तथा नि० का नेकस्य, श्रत्य समुच्चयों के साक्ष्य .... ४७-१४ ६
र. दा० तथा यु० का संबंध : पुतराबत्ति-साम्य ..... रै५६-५७
द. नि० तथा यु० का संबंध : फ़ारसी लिपिजनित विक्ृति-साम्य,
अ्रन्य समुच्चयों के साक्ष्य दर ..... रप्रु७-पुप
४. दा०, नि० तथा गुख० का संबंध : फ़ारसी लिपिजनित विक्ृति-
साम्य, नागरी लिपिजनित विकृति-साम्य, पंजाबी प्रभाव-
साम्य कम म्क न रैन८-१६१
भू. दा० नि० तथा सुण० का संबंध : फ़ारसी लिपिजनित विकृति-
साम्य, नागरीजतित विकृति-साम्य, राजस्थानी प्रभाव-साम्य १६१-६३
६. दा० नि० स० मुख० ””. : फ़ारसी जनित विकृति-साम्य,
राजस्थानी प्रभाव-साम्य ... श्६्दे
७ दा० मि० सा० स० गुण०” : नागरोजनित विकृति-साम्य ... १६३-६४
८. दा० स० गुरष० ': नागरीजनित विकृति-साम्य ... १६४
६. नि० गु० सा० सासी० ”. : पुनराबत्ति-साम्य «त रद४-१६४५
१०. नि० सु० सा० ' .: फ़ारसी लिपिज़नित विकृति-साम्य.. १६४
११. नि० तथा सा० '.: फ़ारसी लिपिजनित विकृति-
साम्य, पुनराबृत्ति-साम्य .. ... १६४५-१६७
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