आदर्श नगर - व्यवस्था | Adarsh Nagar - Vyavastha

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Adarsh Nagar - Vyavastha by श्री भोलानाथ शर्मा - Shree Bholanath sharma

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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हूँ है) में प्रवाहित कर दिया अन्यथा कवि और क्रियात्सक राजनीतिक जीवन का स्वप्न देखने वाला यह युवा अमर तत्त्ववेत्ता न वना होता। सत्यान्वेषण की तत्परता एवं सदत्ति को ही जीवन का चरम लक्ष्य मानने की संलग्नता नें अधन्प के मध्यम श्रेणी के इस साधारण से भौंडे दिखलायी देने वाले व्यक्ति सांफ्रातेस को बह दिव्यता प्रदान की है कि महात्मा गाँधी ने भी उसके जीवन की अत्यधिक प्रणांसा की है। अत्तएव इस अनुपम ग्रंथ में खिर- न्तन विचार असामान्य व्यक्तित्व की छाप और श्रेष्ठ गद्य-शली का एकाघारशिलन होने से रत्त-कास्वस-समागस घटित हुआ हूं एरसा थिव्त की सटान साहित्यिक फ्तियाँ जिस दश-काल के सदभ से उत्पन्न होती है बे उससे कुछ एसी संझिलाट भाव से गथी रहती हैं कि विदेशी भाषा में उनका अनवाद एनकी एक धुबिली छाया साघ्न उपस्थित कर सकता है। एवं उस धंधली छाया का सात्पर्सय समझना भी कोई सरल कार्य नहीं होना । हस इस सखी साया से लखक के भावों की महत्ता उसके बार निधद्ध पात्रों के व्यक्तित्व की सहक एवं उसकी दोली के लावण्य की मतक पा सकीं इसके लिए छगवक को जीवन आर थिंलारों के पडानफाण संबंधी पार्शिपारधिविक की समधिक जानकारी आवध्यक होगी | प्लायोन वी दर्यनगान्पर का अनलीखन करने बाल बिद्ानू इस बिफय से एकसल मो कि हर थिलारां मं पुर्वचर्ती समग्र यनानी चिसतस के से सर्सन्वित और सस्मितित है। यनाती साहित्स से. विद्यार्थी सह भी. भली-्भोति नो हैं कि सलातोन अपने पर्वचर्ती सादिसय खत हनन से. अस्पतिक प्रभा- विन हभ था भर सि उसको सोक्रालीस को सम्पर्क प्राप्त न हुआ होता तो बह प्रथम कोटि का कि और सारककार हुआ होता ने कि तस्वदूर्णी दार्दनिक | ऐसी स्थिति में प्लालोन के विचारों को हृदयंगस करने के लिए उसके पुर्ववर्ती साहित्य और तत्त्वदर्शन से. संकिप्त रूप में पर्शित्रित होता परमावश्यक हैं। सौक्रातीस को व्यक्तित्व को. समभे बिना मी एदातोन




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