राजनीति - शास्त्र | Rajniti Shastra

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
27.5 MB
कुल पष्ठ :
560
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)राजनीति-शास्त्र का स्वरूप, व्याप्ति श्रौर पद्धतियों €मानवके समस्त सामाजिक सम्वन्धोकी विवेचना करता हैं जव कि राजनीति-गास्त्र
केवल राजनैतिक सम्वन्चोकी विदेचना करता है। राज्यकी प्रारम्भिक श्रवस्याग्रोके
सम्बन्धमें यह भले ही सत्य न हो पर वर्तमान राज्यके सम्बन्धमें यह नितान्त सत्य है।
झ्रपनी प्रारम्भिक श्रवस्थामें राज्य एक राजनैतिक सस्थाकी श्रपेक्षा एक सामाजिक
सस्थाके रुपमें श्रधिक था। गिलुक्राइस्ट के शब्दोमें . 'समाज-शास्त्र समाजका विज्ञान
है, राजनीति-शास्त्र राज्यका भ्रथवा राजनेतिक समाजका विज्ञान हैं। समाज-शास्तमें
मनुप्यका एक सामाजिक प्राणीके रूपमें ग्रथ्ययन होता है शरीर चूकि राजनेतिक-मगठन
एक घिणेए प्रकारका सामाजिक सगठन है इसलिए राजनीति-शास्त, समाज-घास्त्रकी
श्रपेला एक श्रधिक विदिष्ट शास्त्र हैं घ्यवा जैसे श्री कोनेनवर्ग ने कहा हैं, 'जवक्ति
समाज-धास्नमें समाजके विभिन्न वर्गों श्रौर सघोके सघठन श्र कार्यकलापोका
का होता है, राजनीति-णास्तका विवेच्य विपय एक विणिष्ट-सघ श्र्थात् राज्य
ता है।'(स) समाज-घास्त्र (50010108४) केवल सगठित्त समृदायोकी ही विवेचना
नही करता , वह ग्रसगठित समुदायोका भी श्रध्ययन करता है। पर राजनीति-दास्त्रका
सम्बन्ध केवल संगठित समाजने ही रहता हैं। चह केवल ऐसे समुदायोका ही सव्ययन
करता हैं जिन पर राजनैतिक समठनका प्रभाव पड चुका होता है। इस प्रकार समाज-
चान्मकी श्रपेक्षा राजनी ति-लारब्रका जन्म यादमें हुसा है।(ग) समाजन्यास्त्र नागरिकोंने वैदालिक तथा विधियासी (1.61) या शनित-
साध्य ((०८०ा४८) सम्चन्धोके साप-याथ परम्परात्रों, श्राचारों ((:05६10115,
णितााटा5) तथा धर्म श्ौर पार्धिक जीवनने विकासका भी श्रध्ययन करता है।
राजनी ति-यारव्रमें केवल प्रपम विपय--वैधानिक तथा उस्तिन्ताध्य सम्बन्चों (1.01
01 000४८ दटाप(1005115) --की ही चिचेचना हाती है।(घ) राजनीति-शान्तमे मनुप्यके जान बूभ् कर नायास ((:001521005) किए
हुए फाणपा ही प्रध्ययन किया जाता हैं, समाज-घस्तने इसके साय-पाय श्रनजानमें
घनायान दिए गए कार्योश भी विवेचन होता हैं। . ”(प) रायनीनिन्यानयरय पा गनन्विन्दू (5818४ 01) या प्रारमन ही
इस घारणाके साथ दै थि मनुष्य एण पर्जनतिए प्राणी है। समाज-यास्त इस घारपासे
पाक स्थिति नफ दृष्टि टालता है थीए उस बातकी विठेच्ना लरना है फि सनुप्य से
श्रं।त पयो रायरमंतिए प्राणी दन गया | रो.. (हर) समायन्यानप वेदल एस जानता पप्ययन रस्ता है कि समाजमें कया हो चुरा हूँ
घोर पया रो रा ऐ स्या होना चाहिए, उपाय सपयप व सही बरता । राजनीविनयस्परा
पार गे एस पएडू रस प्रर्नय शियेसस एएसा है लियया लिया जाना चाहिए? 'करन धपसन ही न पयर स्लानमणण कान मूल अटक काना मी लग न्याय ना नानक
ही «37 पयपरानद, हमसे ये मत, वन उसरए घनतबग ने दिया ह । उनणा रसा
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मत्य पर उम्पोगिदार स्पान पर एएरनसियपस्वाडि घतिशिएर घर उप सही दना,
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सुस्सन भाद रसार शेगएए शदानपत यार गायाय एन कह
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