अभिनंदन ग्रंथ | Abhinandan Granth

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Book Image : अभिनंदन ग्रंथ - Abhinandan Granth

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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न ९1 थ्य् नर प्र दस नै मद्धान्त का मु मत्र-स्वाचलवन में ईघ्वर अप्द प्रचचनमाताए उत्थान एव घर्मणासन नावनाबोग - एक सीनासा पर्याप्तियोग भाषा और थाब्द जैन नागमों में वनस्पतिधिज्ञान जैन खगोलविज्ञान जनागमो में गुहस्याचाण उपासक का आचाए मनिचाररहस्य राम से नाम बडा जैनसिद्वान में कारा-कार्यव्यवस्था जैनागम में प्रयुक्त निव्चय और व्यवहार नब्दों का अदान्यान जैनयस्क्ृति का प्रायतत्व सबमयोग पथ का सबद-रस्नबय तप, तापसंपरम्पदय बगैर महानपस्वी सहावीर समाधिमर्ण जैनदर्यन में नीतियास्त्र नैनागमों के तीन प्रेरक प्रमग जैनागमों में कल्पनिन्पण समन्तमद्र की जैनदर्यन को देन मुनियों घोर योगियों के बटभन मात्म-परमात्मवाद श्रमणपरम्परा और गगतत्र गीतोकत स्वभाव छद्व्वमसलूव विदेगों में बाफाहार निष्त्रय और ब्यंवहा लय वीरसघ की चिभूतिया- न्ड झ ञ न्प न की डा. न हु) [1 1 ्ह गन न रु थे 4 अनुभव हा चर दे हर अ ... भुनिश्नी कन्टैयालाल “कमल' प्रो० रनन्त लुन्या मुनिश्नी युलावचन्दर 'निोही' सुनिश्नी नयमल (निक्ायसचिव) सुनिधी मिधीमल 'मघुकर' कन्हैयालाल लोढ़ा प० सिलापचन्द्र कटारिया प० उयकुमार प० जम्दुप्रसाद होरालाल शास्त्री हरिभाऊ उपाध्याय अजितकुसार शास्त्री प० बदीघर जन शी सुरेदा मुनि साध्वी उसराव कुवर “अर्चना” राजस्थान के जेन वीर श्रौर प्रभासक मुनि सुझीलकुमार सुरेवा मुनि शरूत्तिशील दार्मा मुनि श्रीचन्दनमल थी देवेन्द्रमुनि दरदारीलाल कोठिया शी सौभाग्य मुनि “कुमुद” प्ो० जयन्तीप्रसाद जन डा० बद्दीप्रसाद पचोली राव नारायणसिंह मसुदा सुमित्त भिव्खु महेन्द्र राजा जन प० कुन्दनछाल लैन 'डा० कलादाचन्द्र जन तृतीय खण्ड एृ० १--१७५९ संस्कृति, कला, द्मपनन्कृति तथा जैनवर्म जैन सस्कृति-यरोज ली पाच पखुडिया , इतिहास डा० देवेन्दकुमार पारसमल प्रसुन - ७५ ७3 १०७ ११० १३० १३६ | श्च््द श्घ्€ श्द्श श्श्८ २०३ रण ३०८ ३१७ च्ण्द श्‌ &




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