मानक हिन्दी कोश खण्ड 2 | Manak Hindi Kosh Khand-2
श्रेणी : साहित्य / Literature

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Add Infomation AboutRamchandra Verma
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
45.64 MB
कुल पष्ठ :
563
श्रेणी :
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लेखकों के बारे में अधिक जानकारी :
बद्रीनाथ कपूर - Badrinath Kapoor
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रामचन्द्र वर्मा - Ramchandra Verma
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)खोंचन रद जोजक स्त्री १ मुदुढठी। २. मुदुठी भर चीज | पुं० स० क्रौच एक प्रकार का वगला। खोचन--स्वी० स० कुचन १. खोचने अर्थात् गठाने या चुमाने की क्रिया था भाव। २. गइने या चुभनेवाठी चीज दे. सटकने या चुभने- वाली वात। तीखी वात ।उदा०--घिक वे मातु पिता घिक श्राता देत रहत यो हो खोचन ।--सूर। खोघचा--पु० हिं० खोचन १. बह वाँस जिसपर पक्षियों को फंँसाने के छिए घहेलिये लासा लगाते है। २. वह लकढी जिससे वृक्षों के फछ तोड़े जाते है। ३ दे० खोच । ४. दें० खोचन 1 खोचिया--पु० हिं० सोची १. सोची लेनेवाला। दे० योची २. मिखमगा। भिक्षुक । पु० हिं० सोचा १ सोचा लगाकर फल तोड़नेवाला । २ खोचा लगाकर चिडियाँ फँसानेवाछा वहेलिया । खोची--स्त्री हिं० खोचा १ सेवकों अथवा भिखारियों को दिया जानेवाला अन्न । २. जमीन या मकान का किसी भोर निकला या चढा हुआ कुछ या भाग | खोंट--स्त्री हिं० खोटना खोटने का काम । पु० चह जो खोटा गया हो पु०न्न्खरोट। खोदना--स० स० खड १ पीधघों आदि का ऊपरी भाग चुटकी से दवाकर तोड़ना । २ टुकडे-टूकटे करना । खोंटा--वि०-नखोटा। लॉडइर--पु० स० कोटर पेड का भीतरी खोखला भाग जिसमे पदु-पल्नी अपने घर या घोसले बनाते है। खोड़हा--चि० खोडा। खॉड़ा--वि० स० खड से जिसका कोई अग टूटा हुआ हो अयवा न हो। पुं० स्त्री० अत्पा० खोडिया अन्न रखने का वडा बर्तन । कोठिला 1 वुन्देल० उदा०--अव की साल खोडिया गौर बडे मर दूगा अन्न से-+। वृत्दावनलाल वर्मा। खोतला--पु०न्खोता चिडियो का घोसला 1 घोसला । खोया--पु०न्न्खोता घोसला । खोप न --स्त्री हिं० खोपना १. खोपने या चुभने के कारण फटा हुआ अंग। चीर । दरार । २. सिलाई मे दूर-दूर पर कगे हुए थिठगा। ३. दे० खरोच । खोपना1--स० अनु० कोई नुकीठी चीज किसी में गडाना या घँसाना । घोपना । खोपा--पु० हिं० खोपना स्त्री खोपिया खोपी १ हल की वह लकडी जिसमे छगा रहता है। २ छाजन आदि का कोना । ३ भूसा रखने का छप्पर से छाया हुआ गोलाकार स्थान। ४ स्त्रियों के वालों का वेँघा हुआ एक प्रकार का जूडा । खोसना--स० स० कोगन-हिं० ना प्रत्य० गु० खोसवूँ मरा० खोसणे उ० योसिवा एक वस्तु का कुछ अग दूसरी वस्तु मे इस प्रकार डालना रखना यथा लगाना कि वह उसमे अटक या फँस जाय । । डर जैसे-- क बामर में घोती की छाँग सोसना। से टोपी में पाठगी सोसना। यजोजआां--पु० सण्लोद आा० सोद दूध का गाठा किया हुआ बह रेप जिसमे चीनी आदि मिलाकर वरफी पेटे भर दूसरी मिठाइयां बनाई जाती सोया । मावा। खोइड्रार--पु० हि सोईन-आार प्रत्य० | वह स्थान जहाँ रम पेरने के वाद गधे की सोई जमा की जाती है। दिग० ब्रज में होनेवाला एक प्रकार या नाट्य जो घर से वरात चली पाने पर वर-पक्ष की रियर्या रात के समय करती हैँ उसमे वे दूल्हा और दुलट्टिन बनकर विवाह का नाट्य तथा राम और कृष्ण की लीलाएं भादि करती हैं । स्त्री० दे० सोई । सोइलरा--सपी० सं० ध्येल गन्ने के टुकड़े उलटते-पठटते हैं। खोइहां--पु० हिं० खोईनहा प्रत्य० चह मजदूर जो गये की सोई उठाकर फेंकता है । खोई--स्नी० स० क्षुद्ठ १. कोल्ड में पेरे हुए गन्नो का बचा हुआ रम- विहीन । सीठी। २. भाड में भुने हुए चावल या घान । लाई। लावा। ३ रामदाने की जाति का एक अत ४. सिर पर लगादे की तरह छपेटा हुआ कबल या चादर । खोफंद--पु० फा० तुकिस्तान या तुर्की का एक प्रसिद्ध नगर। पुं० सम्पूर्ण जाति का एक प्रकार का राग । योसरा--पुं० हिं० खुक्ख या खोखला टूटा हुआ जहाज । लदा० वि०्खोखला। योखला--वि०-न्वयोवला। खोसला--वि० हिं० खुक्ल+ला गु० खोख मरा० खोक १० ऐसी वस्तु जिसका भीतरी अंग या भाग निकल गया हो या न रह गया हो। जैसे-- सोखला पेड। २ जिसमें तत्व या सार न हो। निस्सार। पु० १. खाली और पोली जगह। २. बडा छेद। विवर। खोखा--पु० |वेँ० खोका स्ती० खोखी वालक । लड़का । पु० हिं० खोखला १ ऐसी हुडी जिसका रुपया चुकता हो चुका हो। २. वह कागज जिस पर हुडी लिखी जाती है । खोगीर--पु०-न्लूगीर। देव० चिडियो का घोसला। खोज--स्त्री हिं० खोजना १ किसी खोई या छिपी हुई वस्तु को ढूंढने का काम । २. कोई नई वात तथ्य आदि का पता लगाने का काम। शोध। दे किसी व्यक्ति या पशु के चलने से जमीन या मिटटी पर वननेवाला चिद्न या निशान । मुहा०--खोज भिटाना-ल्वे चिह्न या लक्षण नप्ट करना जिनसे किसी वात या घटना का पता चल सकता हो। ४. उक्त चिक्ठो के आधार पर इस वात का पता लगाने का काम कि कोई किस ओर गया है। ५. गाडी के पहिये की लीक । सोजक --वि०न्त्खोजी। चह वह लाटी जिससे कोल्ट्र में पट्रे हुए
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