कल्याण उपनिसद अंक | Kalyan Upnishd Ank

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Kalyan Upnishd Ank by चिम्मनलाल गोस्वामी - Chimmanlal Goswamiहनुमान प्रसाद पोद्दार - Hanuman Prasad Poddar
लेखक : ,
पुस्तक का साइज़ : 54.74 MB
कुल पृष्ठ : 834
श्रेणी :
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चिम्मनलाल गोस्वामी - Chimmanlal Goswami

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हनुमान प्रसाद पोद्दार - Hanuman Prasad Poddar

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ड ग भर भर म कर १ भी 4 भ् ज्् ई ्छ् किन खवीतीत सौर सवेफारण-स्वरूप तथा उसके जाननेका फल कै न ना ट्री ा सब भूर्तोमं छिपे इए हैं. दिव--कल्याणगुर्णोसे युक्त जान उन्हीं प्रमुक्तो होता नर सब मवकें बन्घनसे मुक्त ॥ ५ एव देवों विश्वकर्मा महात्मा सदा जनानां _ हृदये सन्निविद । हृुदा मनीपा मनसामिझपा य.. एतद्विंदुरछतास्ते सवन्ति ॥ दी देव विश्वकर्मा हूं परमात्मा सबके खामी सब मनुजेकि सदा इृदयमें बसे हुए अन्तर्योमी । इंदय बुद्धि मनसे चिन्तन हो तब इनका हो सक्तात्कोर इस रहस्यको जान गथ जो जन्म-त्युसे होते पार ॥ 0 ६ 7 तमीश्वराणां... परम महेश्वरं ण दे देवतानां परम देवतम्‌ । पद पर्विं पतीनां . परम परस्ता हद डिदाम . देवें.. खवनेशमीव्यय॥ . -... इन्द्र आदि. ऊोनेश्वर जिनको परम महेस्वर जान रहे रद अन्य देवगण भी जिनको निज परम देव है मान रहे । म् पतियेंकि भी पूज्य परम पति जगदीखर जो स्तुत्य महान ः वन. प्रकाशमय परमदेवको समझा हमने. सर्वेप्रघान ॥ रद ७ नतस्थ कार्य करण च विद्यते दि न. तत्समश्ास्यधिकंतर दुच्यतें । एच परास्य दाक्तिर्विविधेष खामादिकी ... शानवलार्केया चर दर 2 देह और इन्द्रियसे उनका है सम्नन्ध नहीं कोई प अधिक कहीं उनके सम भी तो दीख रहा न कहीं कोई । तु न्ञानरूप वल्रूप क्रियामय उनकी पण शार्फि भारी घ् विविध खूपमे छुनी गयी हैं स्वाभाविक उनमें सारा ॥ हु हद पु न तस्थ कश्चित्पतिरस्त ठोफे रिए न चेकिता नें च तस्त लिसम्‌ । गा स॒. कारण करणाधिपाधिपी ग न्‌ चास्स रुथिजनिता न प्दाधिप ॥।




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