भारतीय कविता | Bharitya Kavita
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
8 MB
कुल पष्ठ :
612
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)अूसमिया
सहस्र मृत्यु फे बाद
काल के वक्ष से
भास-भास कर
मेरा जीवन इस पार में
ठहर गया
कितने सैकड़ों क्षणों निरमिषों के दल
भेरे जीवन के गीत
बन्द हो गए स्तब्धता की
अधेरी गुफा में ।
याद आती है शायद,
वीन-से युग में
समाप्त हुआ पक्षी के मुंह का
क्छोलित प्रभात-संगीत |
उड़ गई गान गाते-गाते ।
उड़ती हुई समय की चिड़िया
और अब वह वापस नहीं आयगी
मेरी कामना का कोमल उद्यान
सूखकर क्षार हो गया
य्ह महीं है बसन्त का कोमल ईगित ]
अब बहुत देर हो गई
समय की असहनीय जड़ता है
अब तो वापस नहीं आयगा
उस दिन का प्रभात
स्वप्मलीन
यीवन के स्वार मे
छाल-भनीछ पाल फैला हुआ
रंगीन सुहत |
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