भारतीय कविता | Bharitya Kavita
श्रेणी : साहित्य / Literature

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutPt. Javaharlal Neharu
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
8 MB
कुल पष्ठ :
612
श्रेणी :
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about पंडित जवाहरलाल नेहरू -Pt. Javaharlal Neharu
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)अूसमियासहस्र मृत्यु फे बादकाल के वक्ष सेभास-भास करमेरा जीवन इस पार मेंठहर गयाकितने सैकड़ों क्षणों निरमिषों के दल
भेरे जीवन के गीतबन्द हो गए स्तब्धता की
अधेरी गुफा में ।याद आती है शायद,
वीन-से युग मेंसमाप्त हुआ पक्षी के मुंह का
क्छोलित प्रभात-संगीत |उड़ गई गान गाते-गाते ।उड़ती हुई समय की चिड़िया
और अब वह वापस नहीं आयगी
मेरी कामना का कोमल उद्यान
सूखकर क्षार हो गयाय्ह महीं है बसन्त का कोमल ईगित ]
अब बहुत देर हो गईसमय की असहनीय जड़ता है
अब तो वापस नहीं आयगाउस दिन का प्रभातस्वप्मलीनयीवन के स्वार मेछाल-भनीछ पाल फैला हुआ
रंगीन सुहत |
User Reviews
No Reviews | Add Yours...