भारतीय कविता | Bharitya Kavita

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : भारतीय कविता  - Bharitya Kavita
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about पंडित जवाहरलाल नेहरू -Pt. Javaharlal Neharu

Add Infomation AboutPt. Javaharlal Neharu

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
अूसमियासहस्र मृत्यु फे बादकाल के वक्ष सेभास-भास करमेरा जीवन इस पार मेंठहर गयाकितने सैकड़ों क्षणों निरमिषों के दल भेरे जीवन के गीतबन्द हो गए स्तब्धता की अधेरी गुफा में ।याद आती है शायद, वीन-से युग मेंसमाप्त हुआ पक्षी के मुंह का क्छोलित प्रभात-संगीत |उड़ गई गान गाते-गाते ।उड़ती हुई समय की चिड़िया और अब वह वापस नहीं आयगी मेरी कामना का कोमल उद्यान सूखकर क्षार हो गयाय्ह महीं है बसन्त का कोमल ईगित ] अब बहुत देर हो गईसमय की असहनीय जड़ता है अब तो वापस नहीं आयगाउस दिन का प्रभातस्वप्मलीनयीवन के स्वार मेछाल-भनीछ पाल फैला हुआ रंगीन सुहत |




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now