संयुत्त - निकाय भाग - २ | Sanyukta Nikaya Bhag - 2
श्रेणी : साहित्य / Literature

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutBhikshu Jagdish Kashyap
Add Infomation AboutBhikshu dharmrakshit
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
32 MB
कुल पष्ठ :
431
श्रेणी :
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखकों के बारे में अधिक जानकारी :
भिक्षु जगदीश काश्यप - Bhikshu Jagdish Kashyap
No Information available about भिक्षु जगदीश काश्यप - Bhikshu Jagdish Kashyap
भिक्षु धर्मरक्षित - Bhikshu dharmrakshit
No Information available about भिक्षु धर्मरक्षित - Bhikshu dharmrakshit
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)৮০ 0७ ऊ ৮9 < चट < २ 5অজি डि রকি भन्ति ७. ।
90 छ € => ©१ ४८५ < ^>> ^$ তে ॐ ৮৫=
৬৪
|= इ + ~ अंमनापामनप सुत्त, मनापामनाप सुत्त
, आवेणिक सुत्त, तीहि सुत्त, कोधन सुत्त, उपनाह सुत्त, इस्सुकी सुत्त„ मच्छरी सुत्त, अतिचारी सुत्त
दुस्सीर सुत्तभप्पस्सुत सुत्त„ कुसखीत सुत्त
, अुदस्सति सुत्त
, पञ्चवेर सुत्त» अकोधन सुत्त
« अनुपनाही सुत्त
« अनिस्सुकी सुत्तअमच्छरी सुत्त, अनतिचारी सुत्त
, सीरखवा सुत्तबहूुस्सुत सुत्त
विरिय सुत्त, सति सुत्तपन्चशीलछ सुत्तविसारद सुत्त
पसद्य सुत्त
अभिभ्षुय्य सुत्त
एक सुत्तभङ्ग सुत्त
नासेति सुत्त
हेत सुत्त( ८ )तीसरा परिच्छेद३५. मातुगाम संयुत्तपहला भाग ; पेय्याल बेपुरुष को लुभानेवाक़ी ঝা
स्री को लुभानेवाला पुरुष
स्त्रियों के अपने पॉच दुःश्ष
तीन बातो से स्िर्या की द्गति
पाँच बातों से स्लियाँ की दुर्गति
निरजইত্ঘান্তकृपणकुलटादुराचारिणीअद्यश्रुतआरसीभोदीपाँच अधर्मा से युक्त की दुर्गतिदूसरा भाग. : पेथ्याल वँपाँच बातों से झ्लियों की सुगति
मे जलनाईर्ष्या-२ह्वितकृपणता-रहितपतिन्रतासदाचारिणीबहुश्चुतपर्श्रिमीतीच-बद्धिप्श्नशोक्ष-युक्ततीसरा भाग ; बल घ्मखत्री को पाँच बर्धों से प्रसन्नता
स्वामी को वश में करना'
स्वामी को दुबाकर रखना
ज्रीको दबाकर रखनाহী ঈ সাল बलस्त्री को कुछ से हृदा देना
सत्री-वल से स्थर्ग प्राप्ति११५ १
५.५१
११.११६
১১০
५.५१
५५५२
५५११
५५.५३
१५१६
५१५३.
५५१५६
4৭
৯১৮
५५१५३.নম
8,
५५
পন
७५५४
७५ ४
নান
নান
০১
५५१५५५५ই
५५६
५११५६
৬৭৪,
५१५६
५५५७
५५५७
User Reviews
No Reviews | Add Yours...