बाल विकास | Bal Vikas

Bal Vikas by डॉ. सरयू प्रसाद चौबे - Dr. Saryu Prasad Choubey

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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बाल अध्ययन के उदेश्य और विधियां ५ बालकों का उचित पथ-प्रद्शन श्रावर्यक---- समाज हित की दृष्टि से यह आवश्यक है कि बालकों का उचित पथ-प्रदर्शन किया जाय, क्योंकि समाज के वे ही भावी नागरिक व निर्माता होते हैं । उनका विकास जितना शअ्रच्छा हो सकेगा उतना ही श्रच्छा वे समाज के निर्माण में अपना योगः दे सकेंगे । योग्य नागरिकों की सहायता से ही विभिन्न मानव सम्बन्धों को सुधारा जा सकता है, समाज से अन्याय को दूर किया जा सकता है और एक नये आदशे- समाज को स्थापना की जा सकती है। भारयवश बालक गतिशील रहकर दिये हुए सुझावों के अश्रनुसार अपने को बनाने में समर्थ होते हैं । तभी तो उनके सुधार की चेष्टा की जाती है और तभी मानव भी उत्तरोत्तर विकास के पथ पर चलता जा रहा है । बाल मनोवेज्ञानिकों की खोजों और शिक्षा-विशेषज्ञों की धारणाश्रों से यह विश्वास बंघता है कि सभ्यता सर्देव उन्नति के पथ पर अग्रसर रहेगी । उपयु क्त विवरण के बाद बाल अध्ययन में जाई जाने वाली विधियों की ओर यहाँ संकेत कर देवा संगत दिखलाई पड़ता है ग्रतः नीचे हम इन्हीं की ओर शा रहे हैं । बाल अध्ययन की पिधियाँ? बालक के सम्बन्ध में ठीक-ठीक बातें वेज्ञानिक विधियों के सहारे ही मासूम ही सकती हैं। नीचे कुछ ऐसी विधियों का नाम दिया जा रहा है १->व्यक्तिगत श्रॉकन * २---नियन्तिव व्यक्तिगत निरीक्षणः २-- मान निरूपक तथा प्रश्नावसी विधि ४--व्यक्ति इतिहास विधि * ५--मनः: शारीरिक भ्रध्ययन० ६ --परीक्षगात्मके विधियां! ७-- चिकित्सक विधि! ल-- जीवन चरित? १. व्यक्तिगत श्रॉकन---- व्यक्तिगत रश्राकन विधि में निरीक्षणकर्त्ता बाल व्यवहार का शअ्रध्ययन श्रपनीं পন এপ পাকা পা বস পাস পলা মানসী লা পা घर ০ 1০00০905০01 ০0119 9৮ 2, 9019)০81%6 4127012159], 3. ८०१. [০1160 991১19০6155 0১561৮80100. 47880050516 अपव 08৩$01০9- 09175700017171000. 5” ০৪৪১1715৮01 ৬০. 6. 79$5০1)01775579] 3000163. 7. सिएव्यांग्र 7७1 1०६०0. ४. 200৩0115802] 01600০0- 9. 810879719-




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