संसार और धर्म | Sansar Or Dharm

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Sansar Or Dharm by किशोरीलाल मशरूवाला - Kishorilal Mashroowalaमहेंद्र कुमार जैन - Mahendra kumar Jain

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महेंद्र कुमार जैन - Mahendra kumar Jain

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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अनुक्रमणिका पुर्व अनुवादरे दो হাল ३ अपोदघात ७ - ्यानिगत भानवौ षं १ विचार, २ विनय, हे अुधमशीछता, ४ बीरा, ५ दूरद्भिता, ६. पैये, ७ मतोप, ८ मयम २. भनोधं है १२-१८ १. आधा और भय, २ हपँ और विपाद, ३ रोध, ४ दया, ५ बासना और प्रेम ~> ২ ३. भणमी १८-२० $. कौटुम्णिए' सम्य्प २०-२३ १ पति, २ पिता, ३ पुत्र, ४॑ यन्पु-दान्यव ५. सीषपरीय तंत्र या भनुष्पोंगा वापस्सिर क्षर््र २४-२९ १ गमसदार ओर नादान, २ धनी और निर्धन, ३ स्वामी ओर सेयर, ४ राजा और प्रजा ছি, কাযা ঘন ३०-३४ है जुपवारशोलता, ३२ स्पाय, ह दयाददाशिष्य, ४ कृतशता, ५ निष्बयटता ७. ध ३८-३७ भुत्तरा्प १. मलुप्पन्धायों १ गदुप्प-शरोर और अुझगो रचना, २ जि दै. मानय अमा, अत्य জুল্মলি र धमे, < मन्व জীবনী জহঘি ভীত জলা ভন




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