गृह प्रबंद शास्त्र | Grah Prabandh Shastra

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Book Image : गृह प्रबंद शास्त्र  - Grah Prabandh Shastra
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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परिश्रम 1 छुमनुष्य एक दूसरेकी आवश्यकता ओंको पूरी करनेके छिए आप- सम मिकते हैं । किसान जमीन नोतफर अन्न पैदा करता है, जुल्मा- हा सूत बुनकर कपड़ा तैयार करता है और दर्जी उसे काट छँद करके उमदा तर्रीकेसे सीं देता है । रानमसूर मकान बनाते हैं जिनमें हम सुख चैनते रहते हैं । इस तरह हर एक व्यक्ति एक दुसेरकी सरूरतकों पूरी करता हे ।कैसी ही भद्दी चीजू क्यों न हो, यदि उसमें परिश्रम और योग्यता सफ की जाय, तो बह एक सुंदर रूपमें बदलकर बहुमूल्य वस्तु हो नायगी | मनुष्य परिश्रमका हेना... ऐसा ही नुरूरी है मैसे शरीरमें आत्माका होना । यदि यह गुण निकाल छिया जाय हो मनुप्यनाति संत्काठ यमलोकको पहुँच नाय 1 सेट पाठ ( रा एप ) को कथन है कि“ जो काम नहीं करेगा चह भुख्लों मरेगा 1” यहीं कारण था कि बह स्वयं अपने हाथसे काम किया करता था ।उदाहरणके ढिए एक बूढ़े फिसानकी कहानी डिसी नाती है | उसने मरते समय अपने तीन आठसी बेटोंको बुलाकर कहा कि अमुक खेतमें जो मै तुम्हारे छिए छोड़े नाता हूँ बहुतसा घन गड़ा हुआ है । यह सुनते ही लड़के उछल पढ़े और पूछने लगे की फ्तिनी, वह घन कहाँ गा हुआ है १ बापने उत्तर दिया, सुनो; बताता हूँ; किंतु तुम्हें उसे खोद कर निकाठना पड़ेगा । अभी उसने ठीक ठीक स्थान नहीं बतटापाया था कि उसका दम निकठछ गया । उसके मरनेपर रुपयेकि छोमते बेटोनि तमाम खेत




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