ज्ञानोदय | Gyanodaya 1950 Ac 2527

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Gyanodaya  1950  Ac 2527 by श्री फूलचंद्र - Shri Fulchandra

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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[ १९५० झाल्तिवादी सम्मेलन ४९५ करते थे। पर युद्ध के मूल कारणों और उनके निराकरण का वैज्ञानिक उपाय क्या हो सकता है, इस पर किसी के पास निश्चित मत नहीं था। मि्मेलाकुमार बोस इस दिशामे अपेकाइत ज्यादा साफ सत रखते थे । संक्षेप से इस शान्तिवादों सम्मेलन के आयोजकों का उद्देश्य यह था-- संसार के ऐसे थने हुए शान्तिवादी बुलाएं जाँए, जिनका आहिसा में दृढ़ विश्वास हो; जो जी के रखनात्सक कार्यों में आस्था रखते हों । यदि ऐसे ५० भी व्यक्ति आ जाय॑, तो काफो है। ऐसे व्यक्ति गान्धी जो के निकट सम्पर्क में रहने वाले व्यक्तियों के साथ मिलकर, सलाह-मददाविरा करें, अपने अपने देशों का अनुभव बताया; फिर भारतवर्ष के विभिन्न रचनात्मक आश्रमों और केन्दों में प्रप बनाकर धमें; फिर सेवाय्राम मं बैठ कर एक निदिजित कार्यक्रम बनावें। सम्मेलन के आयोजकों का मत है कि सम्मेलन कोई चमत्कार नहीं दिखा देगा। पर इससे कुछ व्यावहारिक परिणाम अवश्य निकलेगा । इसके जरिये एक बिइ्वसंघ बन सकता है जो सामाजिक और राजनेतिक समस्याओं के सुलझावे में अहुसा का प्रयोग करेगा । २. इसके द्वारा सानव-विधारों को दार्ति की ओर ले जाने का नया रास्ता निकाला जा सकता है। ३. इसके हारा सहयोग के आधार पर संसार को सामाजिक व्यवस्था थनाई जा सकती हे ४. इसके द्वारा विश्व-बन्धत्व, विदव-सरकार और जातीय एकता को बढ़ाने में सहायता मिल सकती है। सम्मेलन के आयोजकों की राय में विदवबन्धुत्व और विश्वदान्ति के लिए निद्चथ हो बे थोड़े से प्रयत्न है, जिनके लिए काम किया जा सकता हू । यह यू० एन० ओ० अथवा अन्य किसी ऐसी संस्था से प्रतियोगिता करने वाली संस्था नहीं होगी। पर यह ऐसी संस्था होगी, जो किसी न किसी रूप में एक ही उदहेश्य को लेकर किन्तु भिन्न साधनों से अपना काम करेगी । सम्मेलन के आयोजकों की ओर से एक प्रशनसुची प्रकाशित को गई थो, जिस पर सम्मेलन को विचार करना होगा । इस प्रश्नसुची में मूल रूप से थे छः प्रइन हे :-१. नित्य के जीवन में शान्ति और अहिसा का व्यवहार किस तरह किया जाय ? २. झान्ति के लिए दिक्षा कसी हो ? है. नसवोन और प्रायोन शान्तिवाद और साम्राज्यवाद । ४. जाति और रंग सम्बन्धों समस्याएं तथा उनका हल । ५. बिदव सरकार को ओर शान्ति- वादियों कौ गति कसे हो? और ६. दान्तिवादियों के विदवसंघ को रुप रेखा क्या हो? झान्तिनिकेतन में करोब तीन बोघे में सिफ॑ आम के हो वक्ष है। इसी को कहते हें । साधारण दिनों में इस आश्रबुज्ज में




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