स्वास्थ्य और योगासन | Swasthya Or Yogasan

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
श्रेणी : , ,
शेयर जरूर करें
Swasthya Or Yogasan by प्रतापनारायण मिश्र - Pratapnarayan Mishra

एक विचार :

एक विचार :

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

प्रतापनारायण मिश्र - Pratapnarayan Mishra के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है | जानकारी जोड़ें |

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(देखने के लिए क्लिक करें | click to expand)
इसारा शरीर कि नकद दद्धितनन लिट्रिट्रकनन बने सबक ननकेट्रटटटकनन ननकेट्रेटटबन नगज न्न्टय सटबनन की सांस दी उसे सुन्दर और सुडोल वना देता है। इसी के सहारे शरीर में मिन्न मिन्न प्रकार की गतियाँ हुआ करती हैं । शरोर में मांस की गतियाँ दा प्रकार की हैं । १ जा हमारी इच्छा के ाघीन हैं । यदि दम पैर हिलाना चाहें तो दिलावे न चाहे ता बन्द करदे । यद हुई इच्छाघीन मास-गति । ९ जा पूरी तरदद स्वाघोन है जिस पर दमारी इच्छा झअनिच्छा का कोई प्रभाव नद्दी पड़ता । जैसे हृदय की धड़कन । इस गति को दम बन्द भो करना चाहें तो नद्दी दा सकती । यदद॒ हुई स्वाबीन साँसन्गति । मॉँस पेशियाँ-मांस के सूदम तस्‍्तुओं से बनी द्ोती हैं । इनका एक सिरा इड़ो के एक सिरे पर दूसरा-- दूसरी दुड्डी फे सिरे पर द्ोता है। मास पेशियो का पोषण रक्त द्वारा दोता है इसीलिये रक्त खून की तरद माँस भी लाल रंग का दोता है | खुन की रगें तीन तरदद की होती हैं १ जिनमें झुद्ध रक्त का प्रवाद हृदय से झग प्रत्यन्न को शोर दोता है--वमनियाँ कहलाती हैं । ९ जिनमे खराव रक्त वददता श्औौर वह दूपित होने से नीला हो जाता है--शिखाएँ कदलाती हैं। ३ जो वहुत सूदक्ष घमनियों से सम्बन्धित होती हैं जिनके द्वारा धमनी से शुद्ध रक्त पहुँचता है केशिकाएँ कहलाती हैं । - १५




User Reviews

अभी इस पुस्तक का कोई भी Review उपलब्ध नहीं है | कृपया अपना Review दें |

अपना Review देने के लिए लॉग इन करें |
आप फेसबुक, गूगल प्लस अथवा ट्विटर के साथ लॉग इन कर सकते हैं | लॉग इन करने के लिए निम्न में से किसी भी आइकॉन पर क्लिक करें :