स्वास्थ्य और योगासन | Swasthya Or Yogasan

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
3.63 MB
कुल पष्ठ :
174
श्रेणी :
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लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)[ इसारा शरीरकि नकद दद्धितनन लिट्रिट्रकनन बने सबक ननकेट्रटटटकनन ननकेट्रेटटबन नगज: न्न्टय सटबनन कीसांस दी उसे सुन्दर और सुडोल वना देता है। इसी के सहारे
शरीर में मिन्न मिन्न प्रकार की गतियाँ हुआ करती हैं । शरोर
में मांस की गतियाँ दा प्रकार की हैं । (१) जा हमारी इच्छा के
ाघीन हैं । यदि दम पैर हिलाना चाहें तो दिलावे न चाहे
ता बन्द करदे । यद हुई इच्छाघीन मास-गति । (९) जा पूरी
तरदद स्वाघोन है, जिस पर दमारी इच्छा झअनिच्छा का कोई
प्रभाव नद्दी पड़ता । जैसे हृदय की धड़कन । इस गति को दम
बन्द भो करना चाहें तो नद्दी दा सकती । यदद॒ हुई स्वाबीन
साँसन्गति । »
मॉँस पेशियाँ-मांस के सूदम तस््तुओं से बनीद्ोती हैं । इनका एक सिरा इड़ो के एक सिरे पर, दूसरा--
दूसरी दुड्डी फे सिरे पर द्ोता है। मास पेशियो का पोषण रक्त
द्वारा दोता है इसीलिये रक्त (खून) की तरद माँस भी लाल
रंग का दोता है |खुन की रगें तीन तरदद की होती हैं (१) जिनमें झुद्ध रक्त
का प्रवाद हृदय से झग प्रत्यन्न को शोर दोता है--वमनियाँ
कहलाती हैं । (९) जिनमे खराव रक्त वददता श्औौर वह दूपित
होने से नीला हो जाता है--शिखाएँ कदलाती हैं। (३) जो
वहुत सूदक्ष घमनियों से सम्बन्धित होती हैं जिनके द्वारा धमनी
से शुद्ध रक्त पहुँचता है केशिकाएँ कहलाती हैं ।- १५
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