वृहद् हस्तरेखा शास्त्र | Vrihud Hastrekha Shastra

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Vrihud Hastrekha Shastra by नारायणदत्त श्रीमाली - Narayan Dutt Shrimali

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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हर १. जब भी आपके पास कोई व्यविति भ्पना हाथ दिखाने के लिए आये तो जआापको चाहिए कि आप उसके हाथ का स्पर्श न करें क्योंकि भापके स्पर्श करने से आपके दरीर की विद्युत धारा से उसकी विद्युत धारा का सम्पर्क हो जाएगा भ्रौर उस व्यक्ति के हाथ की मौलिकता समाप्त हो जाएगी । इसलिए हाथ को देखते समय आप भपने हाथ समेटे रहें । २. सबसे पहले उस व्यक्ति के दोनों हाथों को उल्टा करके देखना चाहिए क्योंकि हाथ को उल्टा करने से भ्र्यात्‌ हथेलियां जमीन की भ्रोर रहने से आप उसके हाथ के झाकार को मली प्रकार से समझ सकेंगे कि थह हाथ वर्गाकार है भ्रथवा चौकोर है ्रथवा किस प्रकार का हाथ मेरे सामने प्रस्तुत हुआ है । ३. जत्र हाथ का प्रकार ज्ञात हो जाएं तो उसे दोनों हाथ सीधे करने के लिए कहिये श्रौर दोनों हाथ सीधे होने पर उसके मणिबन्ध से देखते-देखते ऊपर की ओर झाना चाहिए । ४. इसके बाद पव॑त पव॑त के उ भार पर्वत से जुड़ी हुई उंगलियां झौर भंगुठे को देखना चाहिए । अन्त में उसकी उंगलियों के भाग और नाखुनों का निरीक्षण करना चाहिए । ५२.. इस प्रकार हाथ का अध्ययन बिना स्प्दं किये ही कर लेने के बाद उसके हाथ को छूना चाहिए भौर पूरे हाथ के जोड़ों को ध्यान में रखना चाहिए । हाथ के जोड़ श्र्थात्‌ हथेली के जोड़ों से ग्रहों के भागों का भली मांति भध्ययन हो जाता है । उंगलियों के जोड़ों से भी कई तथ्य स्पष्ट हो जाते हैं । हाथ का स्प्न आपको इस बात का मी आभास दे देगा कि वह हाथ नरम है था कठोर लचीला है भ्रथवा सख्त । हाथ की कोमलता बौर कठोरता भी हस्तरेखा विशेषज्ञ के लिए श्रत्यधिक महत्व रखती है । ६. मणिबन्ध की रेखाओं का भी हस्तरेखा विशेषज्ञ के लिए महत्व होता है प्रौर उनका भी अध्ययन कर लेना चाहिए । ७. इसके बाद हथेली पर पायें जाने वाले पवेत पर्वतों के उभार व दबाव साथ ही से जुड़ी हुई रेखाएं दो पर्वतों की संघियां तथा उन पर पाये जाने वाले सुकष्म चिह्लों का भी भ्रघ्ययन करना चाहिए । ८. झन्त में उंगलियों के सिरों पर शंख चक्र आदि दिखाई देते हैं वे भी अपने आप में बहुत भ्रधघिक महत्व रखते हैं । श्रत उनका मी धध्ययन आवश्यक है । हाथ देखने की विधि १. यों तो हाथ किसी भी समय देखा जा सकता है परन्तु इसके लिए सर्वोत्तम समय प्रात काल का होता है जबकि दिखाने वाले ने मोजत या नादता न किया हो ।




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