पोथी प्रश्नोतर संतमत अथवा राधास्वामी पंथ | Pothi Prshnotar Santmat Athva Radhaswami Panth

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Pothi Prshnotar Santmat Athva Radhaswami Panth by राधास्वामी ट्रस्ट - Radhaswami Trust

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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प्रश्न झऔर उत्तर हा श्‌ १--गदा' श्रक्र-चार दल का कँवल-गनेश का |. खासा । जो कि अगले ज़माने में जोग अभ्यास इसी जगह से ,शुरू कराया जाता था इस सबब से 'जोगियों | की देखा देखी गृहस्थी छोग .हर एक काम के शुरू 1 में गनेशजी की .पंजा: करते हैं ॥ २-इन्द्री कंवल-छ;:' दल का-ब्रह्मा यानी ' पैदा करने वाली शक्ती क़ा बासा ॥ ं ३-”नामी. कैँवल-वआाठ दल का-बिस्न यानी पालन करने .वाली शक्ती का बासा ॥ । इन तीन स्थानों याची गदा, इन्द्री आर नाभी | कँवल को मसलमान नासत कहते हैं ॥ श--हिरदे कंबल-बारह दल फो-शिव शच्छो का यासा ॥ ः भ-कंठ चक्र-सोलह दल का-दुरगा. यानी इच्छा शक्ति और आत्मा का धघासा ॥ ' ६-->तीसरा तिल या नेत्र जिसको शिव नेत्र, श्याम _1'सेत वगैरह नाम भी कहते है दो दल :क्रा 'सुरत यानी परम छझात्मा का बासा-शुरू में इस जगह सुरत को .समेदना चाहिये-इस स्थान के साथ - ऊंतः | करण की डोर. ठगी हे है और अंतःकरण के साथ दसों इन्द्रियोँ वगैरह की-इन तीनों स्थानों “यानी |- हिरदे केवल, कंठचक्र और तीसंरे तिल को सुसलमान .,मलकत कहते हूँ-यहाँ - पर. सिफूली स्थानों की दृद्धह ॥ कि




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