दुनिया की कहानी भाग - २ | Duniya Ki Kahani Bhag - 2

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Duniya Ki Kahani Bhag - 2 by राधाकृष्ण शर्मा - RadhaKrishna Sharma

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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अआधुनिक युग का सूत्रपात ७ ( इ ) शिल्प मूति तथा चित्रकला--मव्यकाल मे जीवन तथा प्रकृति के सौन्दर्य में लोगा की कोई ्रमिरुचि नहीं थी । प्रकृति सौन्दर्यदीन समभी जाती थी । सौन्दर्य का प्रदर्शन घोर पाप और प्रायश्चित का विपय माना जाता था | लेकिन अब लोगो की यह धारणा जाती रही । अब कला श्र सौन्दर्य के प्रदर्शन मे लोगो की श्रमिरुचि बढ़ी । शिल्प मूर्ति तथा चित्रकला के बिकास मे भी इटली ही श्रश्रगण्य था । फ्लोरेस नगर के मेडिची राजवश ने कला को बडा ही योत्साहित किया और लॉरेजो के शासनकाल मे इस नगर की उन्नति ्वरम सीमा पर पहुँच गई थी । यह पेरिक्लियन युग के (थेन्स से टक्कर ले सकता था । इटली की कलात्मक प्रतिमा टिशियन बोतेचेली टिन्टोरेटो श्रादि शझ्रनेक कलाकारों में झभिव्यक्त हुई लेकिन यहाँ के तीन कलाकार सुविख्यात थे--ल्योनाडों डा बिन्शी माईकेल एजेलो श्र रैफेल । ल्योनाडों डा विन्शी कृत मोनालिसा चित्र आज भी दशकों की आखों में चकावौध कर देते हैं । डा विन्शी एक कुशल शिल्पी था मूतिकला चित्रकला एव सगीतकला का उद्धद ज्ञाता था | इतना ही नही वह इजीनियरिंग एव वेज्ञानिक प्रदत्तियों और शरीरशास्र का भी विशेषज्ञ था | माइकेल भी चित्रकार मूर्तिकार श्रौर दार्शनिक था । वह मूर्ति तथा मवन-निर्माण-कला में श्रपना सामी नहीं रखता था | वह दीवारों पर बाइबिल के दृश्यों के चित्र खींचता था और सिस्टादनचैंपेल की दीवारों पर उसने स्तिमनिणय सम्बन्धी श्रदूभुत चित्र चित्र १---ल्योनार्डों डा घिन्शी खीचे थे जिनमे श्रातक की प्रधानता है | वेनिस नगर भी कजा का प्रधान केन्द्र था । यहाँ के चित्रकार रगसाजी में कुशल थे। टिशियन यहाँ का प्रसिद चिनकार था। चित्रों के झकन झऔर मूर्ति-निर्माण में/ वास्तविकता सासारिकता श्र सजावट पर बविशष ध्यान दिया जाता था | कला का बिपय धार्मिक होने पर भी सॉन्द्य तथा प्रेम की उपेक्षा नहीं होती थी श्रौर मानवीयता पर अधिक व्यान दिया जाना था । प्रकृति अब सौन्दर्य का श्रनस्त मणडार समम्दी जासे लंगी जिससे प्रक्नति-चित्रणु का विशेष म्रोत्साइन मिला । निर्माण-कला में एक नयी शैली का उदय हुआ जो गौथिक शैली की शपेक्षा श्रधिक सुन्दर होती थी | रोम




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